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samaas ke udaaharan hindi vyakaran सामासिक पदों की सूची समास के उदाहरण

सामासिक पदों की सूची समास के उदाहरण    तत्पुरुष समास (कर्मतत्पुरुष) पद विग्रह पद विग्रह गगनचुम्बी गगन (को) चूमनेवाला पाकिटमार पाकिट (को) मारनेवाला चिड़ीमार चिड़ियों (को) मारनेवाला गृहागत गृह को आगत कठखोदवा काठ (को) खोदनेवाला गिरहकट गिरह (को) काटनेवाला मुँहतोड़ मुँह (को) तोड़नेवाला स्वर्गप्राप्त स्वर्ग को प्राप्त अनुभव जन्य अनुभव से जन्य आपबीती आप पर बीती (सप्तमी तत्पुरुष) उद्योगपति उद्योग का पति (मालिक) गुणहीन गुणों से हीन घुड़दौड़ घोड़ों की दौड़ जन्मांध जन्म से अंधा देशाटन देश में अटन (भ्रमण) दानवीर दान में वीर देशवासी देश का वासी अमृतधारा अमृत की धारा अछूतोद्धार अछूतों का उद्धार आत्मविश्वास आत्मा पर विश्वास ऋषिकन्या ऋषि की कन्या कष्टसाध्य कष्ट से होने वाला हरघड़ी घड़ी-घड़ी या प्रत्येक घड़ी गुरुदक्षिणा गुरु के लिए दक्षिणा गृहप्रवेश गृह में प्रवेश गोबर गणेश गोबर से बना गणेश दहीबड़ा दही में डूबा हुआ बड़ा अकाल पीड़ित अकाल से पीड़ित गोशाला गौओं के लिए शाला गंगाजल गंगा का जल घुड़सवार घोड़े पर सव...

समास-सम्बन्धी कुछ विशेष बातें Samaas sambandhit vishesh niyam

समास-सम्बन्धी कुछ विशेष बातें- (1)एक समस्त पद में एक से अधिक प्रकार के समास हो सकते है। यह विग्रह करने पर स्पष्ट होता है। जिस समास के अनुसार विग्रह होगा, वही समास उस पद में माना जायेगा। जैसे- (i)पीताम्बर- पीत है जो अम्बर (कर्मधारय), पीत है अम्बर जिसका (बहुव्रीहि); (ii)निडर- बिना डर का (अव्ययीभाव ); नहीं है डर जिसे (प्रादि का नञ बहुव्रीहि); (iii) सुरूप - सुन्दर है जो रूप (कर्मधारय), सुन्दर है रूप जिसका (बहुव्रीहि); (iv) चन्द्रमुख- चन्द्र के समान मुख (कर्मधारय); (v)बुद्धिबल- बुद्धि ही है बल (कर्मधारय); (2) समासों का विग्रह करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि यथासम्भव समास में आये पदों के अनुसार ही विग्रह हो। जैसे- पीताम्बर का विग्रह- 'पीत है जो अम्बर' अथवा 'पीत है अम्बर जिसका' ऐसा होना चाहिए। बहुधा संस्कृत के समासों, विशेषकर अव्ययीभाव, बहुव्रीहि और उपपद समासों का विग्रह हिन्दी के अनुसार करने में कठिनाई होती है। ऐसे स्थानों पर हिन्दी के शब्दों से सहायता ली जा सकती है। जैसे- कुम्भकार =कुम्भ को बनानेवाला; खग=आकाश में जानेवाला; आमरण =मरण तक; व्यर्थ =बिना अर्थ का; ...

nay samaas hindi vyakaran नञ समास

नञ समास  नञ समास:- जिस समास में पहला पद निषेधात्मक हो उसे नञ तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमे नहीं का बोध होता है। इस समास का पहला पद 'नञ' (अर्थात नकारात्मक) होता है। समास में यह नञ 'अन, अ,' रूप में पाया जाता है। कभी-कभी यह 'न' रूप में भी पाया जाता है। जैसे- (संस्कृत) न भाव=अभाव, न धर्म=अधर्म, न न्याय= अन्याय, न योग्य= अयोग्य   समस्त-पद विग्रह अनाचार न आचार अनदेखा न देखा हुआ अन्याय न न्याय अनभिज्ञ न अभिज्ञ नालायक नहीं लायक अचल न चल नास्तिक न आस्तिक अनुचित न उचित यह भी पढ़ें |  हिंदी भाषा , लिपि एवं प्रकार वर्ण विचार - परिचय वर्ण विचार - स्वर , व्यंजन हिंदी में संख्याएँ वर्ण विचार - उच्चारण स्थान वर्ण विचार - वर्णमाला शब्द विचार शब्द विचार - हिंदी भाषा में विदेशी शब्द शब्द विचार - देशज शब्द संज्ञा सर्वनाम क्रिया विशेषण की परिभाषा प्रकार एवं उदाहरण वाक्य विचार वाक्य - विग्रह वाक्य विचार , भेद - उद्देश्य , विधेय विराम चिन्ह प्रत्यय उपसर्ग अव्यय वचन वचन की परिभाषा , प्रकार , उदाहरण लिंग कारक काल संधि -विच्छेद संधि परिभाषा समा...

अव्ययीभाव समास हिंदी व्याकरण avyayeebhav samaas hindi vyakaran

अव्ययीभाव समास अव्ययीभाव समास:- अव्ययीभाव का लक्षण है- जिसमे पूर्वपद की प्रधानता हो और सामासिक या समास पद अव्यय हो जाय, उसे अव्ययीभाव समास कहते है। सरल शब्दो में- जिस समास का पहला पद (पूर्वपद) अव्यय तथा प्रधान हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते है। इस समास में समूचा पद क्रियाविशेषण अव्यय हो जाता है। इसमें पहला पद उपसर्ग आदि जाति का अव्यय होता है और वही प्रधान होता है। जैसे- प्रतिदिन, यथासम्भव, यथाशक्ति, बेकाम, भरसक इत्यादि। अव्ययीभाववाले पदों का विग्रह- ऐसे समस्तपदों को तोड़ने में, अर्थात उनका विग्रह करने में हिन्दी में बड़ी कठिनाई होती है, विशेषतः संस्कृत के समस्त पदों का विग्रह करने में हिन्दी में जिन समस्त पदों में द्विरुक्तिमात्र होती है, वहाँ विग्रह करने में केवल दोनों पदों को अलग कर दिया जाता है। जैसे- प्रतिदिन- दिन-दिन यथाविधि- विधि के अनुसार यथाक्रम- क्रम के अनुसार यथाशक्ति- शक्ति के अनुसार बेखटके- बिना खटके के बेखबर- बिना खबर के रातोंरात- रात ही रात में कानोंकान- कान ही कान में भुखमरा- भूख से मरा हुआ आजन्म- जन्म से लेकर पूर्वपद-अव्यय + उत्तरपद = समस्त-पद विग्...

dwandwa samaas hindi vyakaran द्वन्द्व समास paribhasha evam prakar

द्वन्द्व समास द्वन्द्व समास :-  जिस समस्त-पद के दोनों पद प्रधान हो तथा विग्रह करने पर 'और', 'अथवा', 'या', 'एवं' लगता हो वह द्वन्द्व समास कहलाता है। समस्त-पद विग्रह रात-दिन रात और दिन सुख-दुख सुख और दुख दाल-चावल दाल और चावल भाई-बहन भाई और बहन माता-पिता माता और पिता ऊपर-नीचे ऊपर और नीचे गंगा-यमुना गंगा और यमुना दूध-दही दूध और दही आयात-निर्यात आयात और निर्यात देश-विदेश देश और विदेश आना-जाना आना और जाना राजा-रंक राजा और रंक पहचान :  दोनों पदों के बीच प्रायः योजक चिह्न (Hyphen (-) का प्रयोग होता है। द्वन्द्व समास में सभी पद प्रधान होते है। द्वन्द्व और तत्पुरुष से बने पदों का लिंग अन्तिम शब्द के अनुसार होता है। द्वन्द्व समास के भेद द्वन्द्व समास के तीन भेद है- (i) इतरेतर द्वन्द्व (ii) समाहार द्वन्द्व (iii) वैकल्पिक द्वन्द्व (i) इतरेतर द्वन्द्व-:  वह द्वन्द्व, जिसमें 'और' से सभी पद जुड़े हुए हो और पृथक् अस्तित्व रखते हों, 'इतरेतर द्वन्द्व' कहलता है। इस समास से बने पद हमेशा बहुवचन में प्रयुक्त होते है; क्यों...

बहुव्रीहि समास की परिभाषा और उदाहरण bahubreehi samaas hindi vyakaran prabhasha prakar

बहुव्रीहि समास बहुव्रीहि समास :-  समास में आये पदों को छोड़कर जब किसी अन्य पदार्थ की प्रधानता हो, तब उसे बहुव्रीहि समास कहते है। दूसरे शब्दों में-  जिस समास में पूर्वपद तथा उत्तरपद- दोनों में से कोई भी पद प्रधान न होकर कोई अन्य पद ही प्रधान हो, वह बहुव्रीहि समास कहलाता है। जैसे- दशानन- दस मुहवाला- रावण। जिस समस्त-पद में कोई पद प्रधान नहीं होता, दोनों पद मिल कर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते है, उसमें बहुव्रीहि समास होता है। 'नीलकंठ', नीला है कंठ जिसका अर्थात शिव। यहाँ पर दोनों पदों ने मिल कर एक तीसरे पद 'शिव' का संकेत किया, इसलिए यह बहुव्रीहि समास है। इस समास के समासगत पदों में कोई भी प्रधान नहीं होता, बल्कि पूरा समस्तपद ही किसी अन्य पद का विशेषण होता है। समस्त-पद विग्रह प्रधानमंत्री मंत्रियो में प्रधान है जो (प्रधानमंत्री) पंकज (पंक में पैदा हो जो (कमल) अनहोनी न होने वाली घटना (कोई विशेष घटना) निशाचर निशा में विचरण करने वाला (राक्षस) चौलड़ी चार है लड़ियाँ जिसमे (माला) विषधर (विष को धारण करने वाला (सर्प) मृगनयनी मृग के समान नयन हैं जिसके अर्थात सुंदर स...