हिंदी भाषा में विदेशी शब्द – शब्द विचार एवं रचना की दृष्टि से शब्द भेद
शब्द विचार हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण भाग है। हिंदी भाषा में अनेक शब्द अन्य भाषाओं से आए हैं और आज वे हिंदी के सामान्य प्रयोग का हिस्सा बन चुके हैं। इसके साथ ही रचना या बनावट के आधार पर शब्दों को रूढ़, यौगिक और योगरूढ़ शब्दों में बाँटा जाता है।
अँगरेजी से हिंदी में प्रचलित शब्द
हिंदी भाषा में अंग्रेजी के अनेक शब्द अपने मूल रूप में अथवा कुछ परिवर्तन के साथ प्रचलित हैं। दैनिक जीवन और प्रशासनिक, शैक्षिक तथा तकनीकी क्षेत्रों में इनका व्यापक प्रयोग होता है।
| अँगरेजी शब्द | हिंदी में प्रचलित रूप | अँगरेजी शब्द | हिंदी में प्रचलित रूप |
|---|---|---|---|
| ऑफीसर | अफसर | थियेटर | थेटर, ठेठर |
| एंजिन | इंजन | टरपेण्टाइन | तारपीन |
| डॉक्टर | डाक्टर | माइल | मील |
| लैनटर्न | लालटेन | बॉटल | बोतल |
| स्लेट | सिलेट | कैप्टेन | कप्तान |
| हास्पिटल | अस्पताल | टिकट | टिकस |
अँगरेजी के अन्य प्रचलित शब्द
हिंदी में अंग्रेजी के अनेक शब्द लगभग अपने मूल रूप में ही प्रयुक्त होते हैं। इनके उच्चारण में भी बहुत कम परिवर्तन दिखाई देता है।
उदाहरण: अपील, आर्डर, इंच, इण्टर, इयरिंग, एजेन्सी, कम्पनी, कमीशन, कमिश्रर, कैम्प, क्लास, क्वार्टर, क्रिकेट, काउन्सिल, गार्ड, गजट, जेल, चेयरमैन, ट्यूशन, डायरी, डिप्टी, डिस्ट्रिक्ट, बोर्ड, ड्राइवर, पेन्सिल, फाउण्टेन, पेन, नम्बर, नोटिस, नर्स, थर्मामीटर, दिसम्बर, पार्टी, प्लेट, पार्सल, पेट्रोल, पाउडर, प्रेस, फ्रेम, मीटिंग, कोर्ट, होल्डर, कॉलर आदि।
पुर्तगाली शब्द
हिंदी में पुर्तगाली भाषा से आए अनेक शब्द भी प्रचलित हैं। इनमें से कई शब्द आज हिंदी भाषा के सामान्य शब्दों की तरह प्रयोग किए जाते हैं।
| हिंदी शब्द | पुर्तगाली मूल |
|---|---|
| अलकतरा | Alcatrao |
| अनन्नास | Annanas |
| आलपीन | Alfinete |
| आलमारी | Almario |
| बाल्टी | Balde |
| किरानी | Carrane |
| चाबी | Chave |
| फीता | Fita |
| तम्बाकू | Tabacco |
अन्य पुर्तगाली मूल के प्रचलित शब्द: आया, इस्पात, इस्तिरी, कमीज, कनस्टर, कमरा, काजू, क्रिस्तान, गमला, गोदाम, गोभी, तौलिया, नीलाम, परात, पादरी, पिस्तौल, फर्मा, मेज, साया, सागू आदि।
ऊपर दी गई सूची से स्पष्ट है कि हिंदी भाषा में अनेक विदेशी मूल के शब्द प्रचलित हैं। ये शब्द हिंदी भाषा में इस प्रकार घुल-मिल गए हैं कि आज इनमें से अनेक शब्द सामान्य हिंदी शब्दों की तरह प्रयोग किए जाते हैं। इससे हिंदी भाषा की शब्द-संपदा समृद्ध हुई है।
रचना अथवा बनावट के अनुसार शब्दों का वर्गीकरण
शब्दों अथवा वर्णों के मेल से नए शब्द बनाने की प्रक्रिया को रचना या बनावट कहते हैं।
कई वर्णों को मिलाने से शब्द बनता है और शब्द के खंड को शब्दांश कहते हैं।
राम शब्द के दो खंड हैं – रा + म। इन अलग-अलग खंडों का स्वतंत्र रूप से कोई अर्थ नहीं है।
इसके विपरीत विद्यालय शब्द के दो अंश हैं – विद्या + आलय। दोनों खंडों के अलग-अलग अर्थ हैं।
व्युत्पत्ति या रचना की दृष्टि से शब्द भेद
वर्णों के योग से शब्दों की रचना होती है। रचना या बनावट के आधार पर शब्दों को मुख्य रूप से तीन वर्गों में बाँटा गया है—
| क्रम | शब्द भेद |
|---|---|
| 1 | रूढ़ शब्द |
| 2 | यौगिक शब्द |
| 3 | योगरूढ़ शब्द |
1. रूढ़ शब्द
जो शब्द हमेशा किसी विशेष अर्थ को प्रकट करते हैं तथा जिनके खंडों का कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं निकलता, उन्हें रूढ़ शब्द कहते हैं।
दूसरे शब्दों में, वे शब्द जो परंपरा से किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु या प्राणी आदि के लिए प्रयोग होते चले आ रहे हैं, रूढ़ शब्द कहलाते हैं।
रूढ़ शब्द के उदाहरण
नाक शब्द को ‘ना’ और ‘क’ में बाँटने पर दोनों खंडों का कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं निकलता।
इसी प्रकार कान शब्द को ‘का’ और ‘न’ में बाँटने पर दोनों खंडों का कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं निकलता।
2. यौगिक शब्द
जो शब्द अन्य शब्दों के योग से बने हों तथा जिनके प्रत्येक खंड का कोई अर्थ हो, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं।
दूसरे शब्दों में, ऐसे शब्द जो दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के मेल से बनते हैं और जिनके खंड सार्थक होते हैं, यौगिक शब्द कहलाते हैं।
‘यौगिक’ का अर्थ है – योग से बनने वाला।
दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के योग से यौगिक शब्द बनते हैं।
यौगिक शब्दों के उदाहरण
| यौगिक शब्द | खंड |
|---|---|
| आग-बबूला | आग + बबूला |
| पीला-पन | पीला + पन |
| दूधवाला | दूध + वाला |
| घुड़सवार | घुड़ + सवार |
| डाकघर | डाक + घर |
| विद्यालय | विद्या + आलय |
3. योगरूढ़ शब्द
जो शब्द अन्य शब्दों के योग से बनते हों, लेकिन किसी विशेष अर्थ के लिए प्रसिद्ध हो गए हों, उन्हें योगरूढ़ शब्द कहते हैं।
ऐसे यौगिक शब्द जो अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को प्रकट करने लगते हैं, योगरूढ़ शब्द कहलाते हैं।
योगरूढ़ शब्दों के उदाहरण
| शब्द | शब्द-विभाजन | विशेष अर्थ |
|---|---|---|
| लम्बोदर | लम्ब + उदर | गणेश जी |
| दशानन | दश + आनन | रावण |
| पंकज | पंक + ज | कमल |
पंकज का सामान्य अर्थ है – ‘पंक में उत्पन्न होने वाला’, लेकिन हिंदी में यह शब्द विशेष रूप से कमल के अर्थ में प्रसिद्ध है। इसलिए ‘पंकज’ योगरूढ़ शब्द है।
योगरूढ़ शब्द यौगिक होते हैं, लेकिन अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु, प्राणी या स्थान के लिए रूढ़ हो जाते हैं।
रूढ़, यौगिक और योगरूढ़ – एक नजर में
| शब्द भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| रूढ़ | खंडों का स्वतंत्र अर्थ नहीं होता | नाक, कान |
| यौगिक | खंड सार्थक होते हैं | विद्यालय, डाकघर |
| योगरूढ़ | यौगिक होकर विशेष अर्थ में रूढ़ | पंकज, दशानन, लम्बोदर |
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विदेशी शब्द | रूढ़ शब्द | यौगिक शब्द | योगरूढ़ शब्द
हिंदी भाषा में विदेशी शब्द - शब्द विचार Shabda Vichar - hindi vyakaran complete notes videshi shabda
(ई) अँगरेजी शब्द
| (अँगरेजी) तत्सम | तद्भव | (अँगरेजी) तत्सम | तद्भव |
|---|---|---|---|
| ऑफीसर | अफसर | थियेटर | थेटर, ठेठर |
| एंजिन | इंजन | टरपेण्टाइन | तारपीन |
| डॉक्टर | डाक्टर | माइल | मील |
| लैनटर्न | लालटेन | बॉटल | बोतल |
| स्लेट | सिलेट | कैप्टेन | कप्तान |
| हास्पिटल | अस्पताल | टिकट | टिकस |
(उ) पुर्तगाली शब्द
| हिन्दी | पुर्तगाली |
|---|---|
| अलकतरा | Alcatrao |
| अनत्रास | Annanas |
| आलपीन | Alfinete |
| आलमारी | Almario |
| बाल्टी | Balde |
| किरानी | Carrane |
| चाबी | Chave |
| फीता | Fita |
| तम्बाकू | Tabacco |
ऊपर जिन शब्दों की सूची दी गयी है उनसे यह स्पष्ट है कि हिन्दी भाषा में विदेशी शब्दों की कमी नहीं है। ये शब्द हमारी भाषा में दूध-पानी की तरह मिले है। निस्सन्देह, इनसे हमारी भाषा समृद्ध हुई है।
रचना अथवा बनावट के अनुसार शब्दों का वर्गीकरण
कई वर्णों को मिलाने से शब्द बनता है और शब्द के खण्ड को 'शब्दांश' कहते है। जैसे- 'राम में शब्द के दो खण्ड है- 'रा' और 'म'। इन अलग-अलग शब्दांशों का कोई अर्थ नहीं है। इसके विपरीत, कुछ ऐसे भी शब्द है, जिनके दोनों खण्ड सार्थक होते है। जैसे- विद्यालय। इस शब्द के दो अंश है- 'विद्या' और 'आलय'। दोनों के अलग-अलग अर्थ है।
(4)व्युत्पत्ति या रचना की दृष्टि से शब्द भेद
दूसरे शब्दों में- वे शब्द जो परंपरा से किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु या प्राणी आदि के लिए प्रयोग होते चले आ रहे हैं, उन्हें रूढ़ शब्द कहते हैं।
सरल शब्दों में- जिन शब्दों के खण्ड सार्थक न हों, उन्हें 'रूढ़' कहते है।
जैसे- 'नाक' शब्द का खंड करने पर 'ना' और 'क', दोनों का कोई अर्थ नहीं है।
उसी तरह 'कान' शब्द का खंड करने पर 'का' और 'न', दोनों का कोई अर्थ नहीं है।
(ii)यौगिक शब्द :-जो शब्द अन्य शब्दों के योग से बने हो तथा जिनके प्रत्येक खण्ड का कोई अर्थ हो, उन्हें यौगिक शब्द कहते है।
दूसरे शब्दों में- ऐसे शब्द, जो दो शब्दों के मेल से बनते है और जिनके खण्ड सार्थक होते है, यौगिक कहलाते है।
दो या दो से अधिक रूढ़ शब्दों के योग से यौगिक शब्द बनते है; जैसे- आग-बबूला, पीला-पन, दूध-वाला, घुड़-सवार, डाक +घर, विद्या +आलय
यहाँ प्रत्येक शब्द के दो खण्ड है और दोनों खण्ड सार्थक है।
अथवा- ऐसे यौगिक शब्द, जो साधारण अर्थ को छोड़ विशेष अर्थ ग्रहण करे, 'योगरूढ़' कहलाते है।
मतलब यह कि यौगिक शब्द जब अपने सामान्य अर्थ को छोड़ विशेष अर्थ बताने लगें, तब वे 'योगरूढ़' कहलाते है।
लम्बोदर =लम्ब +उदर बड़े पेट वाला )=गणेश जी
दशानन =दश +आनन (दस मुखों वाला _रावण)
'पंक +ज' अर्थ है कीचड़ से (में) उत्पत्र; पर इससे केवल 'कमल' का अर्थ लिया जायेगा, अतः 'पंकज 'योगरूढ़ है।
बहुव्रीहि समास ऐसे शब्दों के अंतर्गत आते हैं।
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