वर्ण विचार (Varn Vichar) हिंदी व्याकरण नोट्स Hindi Vyakaran Complete Notes

हिंदी वर्ण विचार – वर्ण, स्वर, व्यंजन एवं वर्णमाला

📚 हिंदी वर्ण विचार
वर्ण विचार हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण भाग है। इसमें वर्ण, वर्णमाला, स्वर, स्वरों के भेद, व्यंजन, व्यंजनों के भेद, अयोगवाह, उच्चारण तथा वर्णों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है।

वर्ण विचार क्या है?

वर्ण विचार हिंदी व्याकरण का वह भाग है जिसमें वर्णों, वर्णमाला, स्वरों, व्यंजनों तथा उनसे संबंधित विभिन्न नियमों का अध्ययन किया जाता है।

वर्ण की परिभाषा

भाषा की सबसे छोटी इकाई, जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते, उसे वर्ण कहते हैं।

उदाहरण: अ, र, क्, म्, च् आदि।

वर्ण विचार के अंतर्गत मुख्य रूप से वर्णमाला, स्वर, स्वर के भेद, व्यंजन, व्यंजन के भेद तथा अयोगवाह आदि का अध्ययन किया जाता है।

अधिक जानकारी: REET Notes


हिंदी वर्णमाला में कुल कितने वर्ण हैं?

वर्णों का व्यवस्थित क्रम वर्णमाला कहलाता है।

📌 महत्वपूर्ण:
हिंदी वर्णमाला में सामान्यतः 52 वर्ण माने जाते हैं।

स्वर किसे कहते हैं?

जिन वर्णों के उच्चारण में दूसरे वर्णों की सहायता नहीं लेनी पड़ती, वे स्वर कहलाते हैं।

हिंदी में स्वर कितने हैं?

हिंदी में सामान्यतः 11 स्वर माने जाते हैं।

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

स्वर के भेद

स्वरों को मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों में समझा जाता है:

1. ह्रस्व स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में सबसे कम समय लगता है, उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं।

उदाहरण: अ, इ, उ, ऋ

2. दीर्घ स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वर से लगभग दुगुना समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं।

उदाहरण: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

3. प्लुत स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वर से लगभग तिगुना समय लगता है, उन्हें प्लुत स्वर कहते हैं।

📌 ध्यान दें:
वर्तमान हिंदी में प्लुत का प्रयोग मुख्यतः विशेष प्रकार के उच्चारण को दर्शाने के लिए किया जाता है।

उदाहरण: ओऽऽम् आदि।


स्वरों की मात्राएँ

स्वरों के निर्धारित चिह्न, जो व्यंजनों के साथ जुड़कर उनका स्वरूप बदल देते हैं, मात्राएँ कहलाती हैं।

उदाहरण:
क + ा = का
क + ि = कि
क + ी = की
क + ु = कु
क + ू = कू
क + े = के
क + ै = कै
क + ो = को
क + ौ = कौ

व्यंजन किसे कहते हैं?

जो ध्वनियाँ स्वरों की सहायता से बोली जाती हैं, उन्हें व्यंजन कहते हैं।

उदाहरण: क = क् + अ

हिंदी के व्यंजन वर्ण

हिंदी के व्यंजनों को उनके उच्चारण एवं स्वरूप के आधार पर विभिन्न वर्गों में विभाजित किया जाता है।

1. स्पर्श व्यंजन या वर्गीय व्यंजन

पाँच-पाँच व्यंजनों का एक-एक वर्ग होता है। ऐसे पाँच वर्ग होते हैं। इन व्यंजनों का उच्चारण मुख के विभिन्न स्थानों से होता है, इसलिए इन्हें वर्गीय या स्पर्श व्यंजन कहा जाता है।

वर्ग वर्ण उच्चारण स्थान
क-वर्ग क, ख, ग, घ, ङ कंठ
च-वर्ग च, छ, ज, झ, ञ तालु
ट-वर्ग ट, ठ, ड, ढ, ण मूर्धा
त-वर्ग त, थ, द, ध, न दंत
प-वर्ग प, फ, ब, भ, म ओष्ठ

क् से म् तक के वर्णों को स्पर्श व्यंजन कहा जाता है।

2. अंतस्थ व्यंजन

य, र, ल, व को अंतस्थ व्यंजन कहते हैं। इनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के मध्यवर्ती रूप जैसा माना जाता है।

अंतस्थ व्यंजन: य, र, ल, व

इन चारों वर्णों को अर्धस्वर भी कहा जाता है।

3. ऊष्म व्यंजन

श, ष, स, ह को ऊष्म व्यंजन कहते हैं। इनके उच्चारण में घर्षण से उत्पन्न वायु का विशेष प्रभाव होता है।

ऊष्म व्यंजन: श, ष, स, ह

अल्पप्राण और महाप्राण

हवा को संस्कृत में प्राण कहा जाता है। इसी आधार पर कम वायु के साथ उच्चरित ध्वनि को अल्पप्राण और अधिक वायु के साथ उच्चरित ध्वनि को महाप्राण कहा जाता है।

अल्पप्राण

प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा और पाँचवाँ वर्ण अल्पप्राण माना जाता है। सभी स्वर भी अल्पप्राण माने जाते हैं।

उदाहरण:
क, ग, ङ | च, ज, ञ | ट, ड, ण | त, द, न | प, ब, म

महाप्राण

प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण माना जाता है। इनके उच्चारण में वायु की मात्रा अधिक होती है।

उदाहरण:
ख, घ | छ, झ | ठ, ढ | थ, ध | फ, भ

ऊष्म वर्ण भी महाप्राण माने जाते हैं।

अल्पप्राण, महाप्राण और अनुनासिक वर्ण

श्रेणी वर्ण
अल्पप्राण क, च, ट, त, प तथा वर्गों के तीसरे और पाँचवें वर्ण
महाप्राण ख, छ, ठ, थ, फ तथा वर्गों के चौथे वर्ण
अनुनासिक ङ, ञ, ण, न, म

घोष और अघोष वर्ण

1. घोष वर्ण

जिन वर्णों के उच्चारण में स्वर-तंत्रियों में कंपन या नाद का अनुभव होता है, उन्हें घोष वर्ण कहते हैं।

घोष वर्णों में प्रमुख रूप से:
प्रत्येक वर्ग के तीसरे, चौथे और पाँचवें वर्ण, सभी स्वर तथा य, र, ल, व, ह शामिल हैं।

2. अघोष वर्ण

जिन वर्णों के उच्चारण में स्वर-तंत्रियों का कंपन नहीं होता और श्वास की प्रधानता रहती है, उन्हें अघोष वर्ण कहते हैं।

अघोष वर्ण:
प्रत्येक वर्ग के पहले और दूसरे वर्ण तथा श, ष, स।

अनुनासिक वर्ण

स्पर्श व्यंजनों में प्रत्येक वर्ग का अंतिम अर्थात् पाँचवाँ वर्ण अनुनासिक होता है। इनके उच्चारण में नासिका का प्रयोग होता है।

ङ, ञ, ण, न, म

हल् या हलंत

व्यंजनों के नीचे जब तिरछी रेखा (्) लगाई जाती है, तो उसे हल् या हलंत कहते हैं।

जिस व्यंजन में हलंत लगाया जाता है, उसमें स्वर का अभाव ज्ञात होता है।

उदाहरण:

क = क् + अ
क् = बिना ‘अ’ स्वर के व्यंजन का रूप

हिंदी के नये वर्ण

हिंदी में कुछ ऐसे वर्ण भी प्रयोग किए जाते हैं जिन्हें परंपरागत वर्णों से अलग रूप में पहचाना जाता है।

महत्वपूर्ण वर्ण:
क्ष, त्र, ज्ञ, ड़, ढ़

संयुक्त वर्ण

तीन प्रमुख संयुक्त वर्ण इस प्रकार हैं:

संयुक्त वर्ण निर्माण
क्ष क् + ष = क्ष
त्र त् + र = त्र
ज्ञ ज् + ञ = ज्ञ

ड़ और ढ़ ड और ढ के नीचे नुक्ता लगाने से बने रूप हैं।


📌 वर्ण विचार – एक नजर में

विषय मुख्य जानकारी
वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई
स्वर अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ
अंतस्थ य, र, ल, व
ऊष्म श, ष, स, ह
अनुनासिक ङ, ञ, ण, न, म
संयुक्त वर्ण क्ष, त्र, ज्ञ

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📖 निष्कर्ष

वर्ण विचार हिंदी व्याकरण का आधारभूत एवं महत्वपूर्ण विषय है। वर्ण, स्वर, व्यंजन, उच्चारण, अल्पप्राण-महाप्राण, घोष-अघोष, अनुनासिक तथा हलंत आदि को समझने से हिंदी व्याकरण के अन्य विषयों को समझना आसान हो जाता है।

 

हिंदी : वर्ण विचार

वर्ण विचार



Q.1 वर्ण  विचार  क्या  है ?

उत्तर - वर्ण विचार (Varn Vichar in Hindi) के अंतर्गत हम वर्ण विचार, वर्णमाला, स्वर – स्वर के भेद, व्यंजन – व्यंजन के भेद और अयोगवाह के बारे में पड़ेगे |
वर्ण विचार (Varn Vichar in Hindi) – वर्ण / अक्षर – भाषा की सबसे छोटी इकाई, जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते, वह वर्ण कहलाती है।
जैसे → अ, र, क्, म्, च् आदि  REET Notes

Q.2  हिंदी वर्णमाला वर्णमाला में कुल कितने वर्ण है ? 

उत्तर → वर्णों का व्यवस्थित क्रम वर्णमाला कहलाता है।
→ हिंदी वर्णमाला में कुल 52 वर्ण है।

Q. 3 स्वर किसे कहते हैं ?

उत्तर - जिन वर्णों के उच्चारण में दूसरे वर्णों की सहायता नहीं लेनी पड़ती, वे स्वर कहलाते हैं।

Q. 3 हिंदी में स्वर कितने हैं?

उत्तर →  स्वरों की संख्या 11 होती है। →  ‘‘अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ’’।

स्वर के भेद (Swar ke bhed)

हृस्व स्वर → जिन स्वरों के उच्चारण में सबसे कम समय लगता हैं, उन्हें हृस्व स्वर कहते हैं।
जैसे →    अ, इ, उ, ऋ
दीर्घ स्वर → जिन स्वरों के उच्चारण में हृस्व स्वर से दुगुना समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं।
जैसे →    आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
 प्लुत स्वर → जिन स्वरों के उच्चारण में हृस्व स्वर से तिगुना समय लगता है, उन्हें ‘प्लुत स्वर’ कहते हैं।
→        वर्तमान समय में ‘प्लुत’ स्वर का प्रयोग केवल उच्चारण में किया जाता है।
जैसे →    ओइम, रधियाऽऽऽ

स्वरों की मात्राएँ

मात्रा → स्वरों के निर्धारित चिह्न होते हैं, जो व्यंजनों के साथ जुड़कर उनका स्वरूप बदल देते हैं, ये चिह्न मात्राएँ कहलाते हैं।

व्यंजन

जो ध्वनियाँ स्वरों की सहायता से बोली जाती है। उन्हें व्यंजन कहते हैं।
जैसे – क = क् + अ

हिन्दी के व्यंजन वर्ण

हिन्दी व्यंजनो की संख्या 33 है । 
इन्हे निम्नलिखित वर्गों में बाँटा गया है : 

1.) स्पर्श व्यंजन या वर्गीय : पाँच – पाँच व्यंजनों का एक – एक वर्ग है ।      वर्गों की संख्या पाँच है । इस तरह कण्ठ , तालु , मुर्द्धा , दाँत और ओठ से    बोले जाने के कारण इन्हें स्पर्श व्यंजन कहा जाता है । इन्हे वर्गीय व्यंजन      भी कहा जाता है । ‘क्’ से ‘म्’ तक के वर्णों को स्पर्श व्यंजन कहते हैं ।


   क) कवर्ग – क, ख, ग, घ, ङ, कण्ठ-स्थान से उच्चारण
   ख) चवर्ग – च, छ, ज, झ, ञ, तालु-स्थान से उच्चारण
   ग) टवर्ग – ट, ठ, ड, ढ, ण, मूर्द्धा-स्थान से उच्चारण
   घ) तवर्ग – त, थ, द, ध, न, दन्त-स्थान से उच्चारण
   ङ) पवर्ग – प, फ, ब, भ, म, ओष्ठ-स्थान से उच्चारण 

2.) अन्तस्थ : य, र, ल, व, को अन्तस्थ कहते है ; क्योँकि इनका उच्चारण    व्यंजन तथा स्वरों का मध्यवर्ती-सा लगता है । स्वर व्यंजनों के ये ‘     अन्तःस्थिति ‘ से जान पड़ते हैं । इनका उच्चारण जीभ , तालु , दाँत , और     ओठों के परस्पर सटाने से होता है । इन चारों वर्णों को ‘अर्द्ध स्वर’ भी     कहा जाता है ।

3.) ऊष्म : श, ष, स, ह, इन चारो वर्णों को ऊष्म कहते हैं । इनका         उच्चारण रगड़ या घर्षण से उत्पन्न ऊष्म वायु से होता है । 

अल्पप्राण और महाप्राण 


हवा को संस्कृत में प्राण कहते हैं । इसी आधार पर कम हवा से उच्चरित    ध्वनि ‘अल्पप्राण’ और अधिक हवा से उतपन्न ध्वनि ‘महाप्राण’ कही जाती है ।

1. अल्पप्राण – प्रत्येक वर्ग का पहला , तीसरा और पाँचवाँ वर्ण अल्पप्राण   है । सभी स्वर अल्पप्राण हैं ।
2. महाप्राण – प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण है । इसमें विसर्ग की तरह ‘ह’ की ध्वनि सुनाई पड़ती है । सभी उष्म वर्ण महाप्राण हैं । 

अल्पप्राण महाप्राण अनुनासिक अल्पप्राण


क, च, ट, त, प । ख, छ, ठ, थ, फ । ङ, ञ, ण, न, म ।
ग, ज, ड, द, ब, । घ, झ, ढ, ध, भ ।

घोष और अघोष वर्ण 


1. घोष वर्ण – जिन वर्णों के उच्चारण में केवल नाद का उपयोग होता है , उन्हे घोष वर्ण कहते हैं । स्पर्श वर्णों में प्रत्येक वर्ग का तीसरा , चौथा और पाँचवाँ वर्ण , सभी स्वर वर्ण और य, र, ल, व, ह घोष वर्ण हैं ।
2. अघोष वर्ण – जिन वर्णों के उच्चारण में नाद की जगह केवल श्वाँस का उपयोग होता हैं , वे अघोष वर्ण कहलाते हैं । स्पर्श वर्णों में प्रत्येक वर्ग का पहला , दूसरा और श, ष, स अघोष वर्ण हैं ।


अनुनासिक वर्ण 


स्पर्श वर्णों में प्रत्येक वर्ग का अंतिम यानी पाँचवाँ वर्ण नासिका से बोला जाता है । ये अनुनासिक कहलाते हैं – ङ, ञ, ण, न, म ।

हल् – 


व्यंजनों के नीचे जब एक तिरछी रेखा (्) लगाई जाती है , तब उसे हल् या हलंत् कहते हैं । जिस व्यंजन मे यह लगाया जाता है , उसमे स्वर का अभाव ज्ञात होता है । जैसे – ‘क’ एक व्यंजन है , इसमे ‘अ’ स्वर की ध्वनि छिपी हुई है , स्वतंत्र रूप से इस प्रकार लिखा जायेगा – ‘क्’ ।
हिन्दी के नये वर्ण
हिन्दी में पाँच नये वर्णों का प्रयोग होता है – क्ष, त्र, ज्ञ, ड़, ढ़ ।
तीन सन्युक्त वर्ण हैं – क् + ष = क्ष
त् + र = त्र
ज् + ञ = ज्ञ
ड, ढ के नीचे नुक्ता या बिन्दी लगाकर ड़ , ढ़ बनाये गये हैं ।

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